वो अजीब मुलाकात
तुमसे कई बार मैंने मुलाकात की होगी... लेकिन आज जब तुमसे मिला.. तो ना जाने क्यों मुलाकात में वो कशिश नहीं थी...जो हर बार तुमसे मिलके महसूस की होगी मैने... तुम्हारा आना...और मेरा अजीब सा व्यवहार करना..मेरी आदत में शुमार होने लगा है...ना चाहकर भी ऐसा होने लगा है...बाद में एक कसमसाहट सी रहती है... खुद को कोसता भी हूं, दिनभर एक ही टीस सालती रहती है, कि ना जाने तुम्हें कैसा लगा होगा, कैसे कहूं तुमसे, कि तुम्हें कितनी तवज्जो देता हूं, जब तुमसे अच्छा व्यवहार नहीं कर पाता, तो बुरा लगता है... आखिर ऐसा क्यों हो रहा है..खबर नहीं... खैर... जानता हूं तुम मेरा अच्छा और बुरा व्यवहार सहन करते हो...मैं जाने अनजाने में कुछ कह भी जाता हूं तुम्हारे बारे में... लेकिन पगला हूं ना... बाद में समझ आता है...ऐसा नहीं बोलना चाहिए था... लेकिन मैं जानता हूं कि तुम मेरी सच्ची साथी हो... तुम वो हो जो मेरी तमाम बुराईयों पर भी मेरी खुशी के खातिर पर्दा डाल देती हो... तुम वाकई मेरे लिए बहुत खास हो...
हमेशा ऐसे ही रहना.. आज वक्त की कमी के चलते जो लिखना चाह रहा था... वो नहीं लिख पाया...
लेकिन मैं जानता हूं कि तुमसे ही मेरा पूरा होना लिखा है... तुम्हें लिख देता हूं तो वो अपने आप में पूरा हो जाता है।
हेमंत
तुमसे कई बार मैंने मुलाकात की होगी... लेकिन आज जब तुमसे मिला.. तो ना जाने क्यों मुलाकात में वो कशिश नहीं थी...जो हर बार तुमसे मिलके महसूस की होगी मैने... तुम्हारा आना...और मेरा अजीब सा व्यवहार करना..मेरी आदत में शुमार होने लगा है...ना चाहकर भी ऐसा होने लगा है...बाद में एक कसमसाहट सी रहती है... खुद को कोसता भी हूं, दिनभर एक ही टीस सालती रहती है, कि ना जाने तुम्हें कैसा लगा होगा, कैसे कहूं तुमसे, कि तुम्हें कितनी तवज्जो देता हूं, जब तुमसे अच्छा व्यवहार नहीं कर पाता, तो बुरा लगता है... आखिर ऐसा क्यों हो रहा है..खबर नहीं... खैर... जानता हूं तुम मेरा अच्छा और बुरा व्यवहार सहन करते हो...मैं जाने अनजाने में कुछ कह भी जाता हूं तुम्हारे बारे में... लेकिन पगला हूं ना... बाद में समझ आता है...ऐसा नहीं बोलना चाहिए था... लेकिन मैं जानता हूं कि तुम मेरी सच्ची साथी हो... तुम वो हो जो मेरी तमाम बुराईयों पर भी मेरी खुशी के खातिर पर्दा डाल देती हो... तुम वाकई मेरे लिए बहुत खास हो...
हमेशा ऐसे ही रहना.. आज वक्त की कमी के चलते जो लिखना चाह रहा था... वो नहीं लिख पाया...
लेकिन मैं जानता हूं कि तुमसे ही मेरा पूरा होना लिखा है... तुम्हें लिख देता हूं तो वो अपने आप में पूरा हो जाता है।
हेमंत